स्वतंत्र भारत प्रथम पृष्ठ,5th Oct 2017 पहले यशवन्त सिन्हा  अब अरुण शौरी ने आर्थिक नीतियों एव नोटबन्दी के विरुद्ध आवाज उठाई है।

स्वतंत्र भारत प्रथम पृष्ठ,5th Oct 2017 पहले यशवन्त सिन्हा  अब अरुण शौरी ने आर्थिक नीतियों एव नोटबन्दी के विरुद्ध आवाज उठाई है।
परन्तु विचारणीय प्रश्न यह है कि ये लोग अभी तक क्यों चुप थे?
आज जब सामान्य जनता मोदी सरकार की महगाई ,आर्थिक नीतियों,और सिर्फ जुबानी राष्ट्रवाद से आजिज आ गयी है। GST से छोटे और मझले व्यपारी  त्रस्त है ,रियल स्टेट ,मैनुफैक्चरिंग मे मंदी है ,GDP नीचे जा रही है, नवजवान को रोजगार के अवसर मिल नही रहे है, सरकारी पदों पर भर्ती  निकल नही रही,मंदी के कारण प्राइवेट सेक्टर में नये रोजगार के अवसर हैं नहीं,इलाहाबाद में प्रतियोगी छात्र आंदोलनरत है, लगभग दो लाख शिक्षा मित्र सड़क पर संघर्ष कर राहे हैअपनी नौकरी बचाने के लिये।
देश के इस राजनैतिक परिदृश्य को देख कर लगता है भा ज पा और संघ 2019 को लेकर भयभीत है।और एक सोच समझी रणनीति के अंतर्गत अपने ही लोगो से सरकार की खिलाफ आवाज उठवा रहे है,जिससे सरकार के खिलाफ बने जनमत का फायदा विपक्ष न उठ पाये।
यानी पक्ष भी मेरा विपक्ष भी मेरा और जनता मेरी फुटबाल। किक कोई भी मारे लात तो जनता पर ही पड़नी है।
जब विपक्ष ही नही होगा तो ये यशवन्त सिन्हा अरुण शौरी आदि आदि इनके ही लोग है चुनाव मे संघ कहेगा और ये सब चुप,विपक्ष ख़त्म ।